पूजा और पाठ

पापमोचनी एकादशी: घोर पापों से मुक्ति पाने का दिन

Monday, March 12, 2018 10:50 AM

चैत्र कृष्ण एकादशी को पापमोचनी एकादशी पर्व मनाया जाएगा। पापमोचनी का अर्थ है पाप को नष्ट करने वाली अतः यह एकादशी पाप को नष्ट करती है। पापमोचनी एकादशी पर भगवान विष्णु को अर्घ्य देकर षोडशोपचार पूजन करने का विधान है तत्पश्चात् धूप, दीप, चंदन से आरती करनी चाहिए। इस दिन निंदित कर्म व मिथ्या भाषण नहीं करना चाहिए। इस एकादशी पर भिक्षुक व ब्राह्मणों को भोजन दान देना फलदायी होता है। 

 
पापमोचनी एकादशी किंवदंती के अनुसार चैत्र-रथ रमणीक वन में च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी ऋषि तपस्या करते थे। इसी वन में इंद्र गंधर्व, अप्सराओं व देवगण स्वच्छन्द विहार करते थे। ऋषि शिव भक्त थे व अप्सराएं शिवद्रोही कामदेव की अनुचरी थी। कामदेव ने मेधावी ऋषि की तपस्या को भंग करने हेतु अप्सरा मंजुघोषा को भेजा। मेधावी ऋषि अप्सरा मंजुघोषा पर मोहित हो गए। दोनों ने एकसाथ 57 वर्ष व्यतीत किए। एक दिन जब ऋषि को आत्मज्ञान हुआ तो उन्हें अपनी तपस्या भंग होने का भान हुआ। क्रोधित ऋषि ने मंजुघोषा को पिशाचनी होने का शाप दिया। मंजुघोषा के क्षमा-याचना पश्चात ऋषि का हृदय पसीजा, उन्होंने कहा पापमोचनी एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करने से तुम्हारा शाप समाप्त होगा। इसके बाद मेधावी को पिता च्यवन ने श्राप से बने पाप का बोध कराया। पापमोचनी एकादशी का व्रत करके मंजुघोषा ने शाप से व ऋषि मेधावी ने पाप से मुक्ति पाई। 
 
पापमोचनी एकादशी का व्रत व पूजन करने से ब्रह्महत्या, स्वर्णचोरी, अगम्यागमन, भ्रूणघात जैसे घोर पापों से मुक्ति मिलती है, सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है, मुसीबतों से मुक्ति मिलती है व शत्रुओं का दमन होता है। विशेष पूजन विधि: घर की पूर्व दिशा में लाल वस्त्र बिछाकर श्री विष्णु का चित्र स्थापित करके विधिवत दशोपचार पूजन करें। शहद मिले गौघृत का 11 मुखी दीप करें, चंदन से धूप करें, लाल फूल चढ़ाएं, लाल चंदन से तिलक करें, तुलसीपत्र, ऋतुफल चढ़ाएं व दूध-शहद का भोग लगाकर किसी भी माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। पूजन के बाद भोग गाय को डाल दें।