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मत्स्यावतार पूजन: श्री हरि को लगाएं इस चीज का भोग, मृत्यु भय से मिलेगी मुक्ति

Saturday, February 24, 2018 17:25 PM

फाल्गुन शुक्ल दशमी, मृगशीर्ष नक्षत्र, तैतिलकरण व प्रीति योग है। शास्त्र प्रेम सुखसागर में विष्णु के 24 अवतारों का वर्णन है। आज के योगायोग के कारण विष्णु के 10 मत्स्यावतार का पूजन श्रेष्ठ रहेगा। नारायण ने सृष्टि को प्रलय से बचाने हेतु मत्स्यावतार लिया था। सतयुग में एक दिन राजा सत्यव्रत को नदी में स्नान करते समय एक मछली प्राप्त हुई जिसका आकार असामान्य रूप से बढ़ता गया।

सत्यव्रत की प्रार्थना पर मछ्ली ने स्वयं विष्णु रूप में प्रकट होकर सत्यव्रत से कहा की "सात दिन बाद प्रलय होगी तब तुम एक विशाल नाव में सप्त ऋषियों, औषधियों, बीजों व प्राणियों के सूक्ष्म शरीर को लेकर उसमें बैठ जाना, व मैं मत्स्य के रूप में तुम्हारे पास आकार तुम्हें पार लगाऊंगा"। समयनुसार वही सब कुछ हुआ तथा प्रलय पश्चात मत्स्यरूपधारी श्रीहरी ने राजा सत्यव्रत को तत्वज्ञान का उपदेश दिया, जो मत्स्यपुराण नाम से प्रसिद्ध है। दूसरी मान्यतानुसार जब हयग्रीव ने वेदों को चुरा कर सागर की गहराई में छुपा दिया, तब श्रीहरी ने मत्स्य रूप धारण करके वेदों को प्राप्त कर पुनः स्थापित किया। मत्स्यावतार के विशेष पूजन व उपाय से आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है, पारिवारिक संकट दूर होते हैं, व मृत्यु भय से मुक्ति मिलती है। 

 
पूजन विधि: घर की पूर्व दिशा में लाल वस्त्र पर मत्स्यावतार अथवा भगवान विष्णु के चित्र की स्थापना करके विधिवत पूजन करें। घी में रोली मिलाकर दीप करें, अगरबत्ती से धूप करें, लाल चंदन चढ़ाएं। लाल कनेर के फूल चढ़ाएं। अनार का फलाहार चढ़ाएं। सूजी के हलवे का भोग लगाएं तथा लाल चंदन की माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। पूजन उपरांत फलाहार व भोग लाल गाय को खिलाएं।